BT Cotton बीटी कॉटन पर चर्चा

किसान साथियों नमस्कार आज BT Cotton यानी नरमा की फसल और उसके भविष्य और भूतकाल पर चर्चा करते हैं। किसान साथियों जैसा की पिछली बार हमारी नरमे की फसल अधिकांश क्षेत्र में खराब हुई थी।

आज इस बात पर चर्चा करते हैं की इसमें कौन दोषी है किस कारण से हमारी नरमे की फसल खराब हुई उसे दौरान हमारे कुछ किसान साथियों द्वारा पूरा का पूरा दोष बीज बनाने वाली कंपनियों पर डाल दिया गया।

BT Cotton बीज

कुछ साथियों ने ऐसे ऐसे वीडियो बनाई जिससे बीज बनाने वाली कंपनियों के फील्ड में कार्य करने वाले कर्मचारी जो की हमारे ही परिवारों से संबंधित थे उनके साथ भी दुर्व्यवहार एवं मारपीट की घटनाएं हुई।

क्या किसान इतना असंवेदनशील है? जिसे यह भी पता नहीं के इसमें कौन गलत है और कौन सही है !!!

किसान साथियों मैं यह नहीं जानता की आप इस विषय में क्या सोचते हैं की पिछली बार खराब हुई नरमे की फसल में किसका दोष है लेकिन मैं अपने अनुभव से और अपने क्षेत्र के और कृषि विभाग के उच्च अधिकारियों से चर्चा करने के बाद में अपने जिस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं अपना वह अनुभव आपसे समझ कर रहा हूं आप इस पर एक बार जरूर विचार करें।

फसल ख़राब होने का कारण

किसान साथियों बीज कंपनियां जब बीज तैयार करती है और उसकी थैली पर कहीं भी यह नहीं लिखा होता की इसमें गुलाबी सुंडी का अटैक नहीं होगा कंपनियां तो इतना लिखकर अपना बचाव कर लेती है लेकिन किसान कैसे बचेगा मेरा यह मानना है की पिछली बार खराब हुई नरमे की फसल में किसान का ज्यादा दोषी है इस पर आगे चर्चा करते हैं।

1. हमें नरमे की बिजाई का सही समय का ध्यान नहीं रखने की वजह से काफी हद तक हम इस चीज को जिम्मेदार मान सकते हैं हम नरमे की बिजाई सीजन से दो-दो महीने एडवांस कर रहे हैं फिर वह फसल प्रकृति में अपना बैलेंस कैसे बनाएगी यह सबसे जरूरी और विचार करने वाला मुख्य बिंदु है।

2. हम नरमे की बिजाई करते हैं क्या किसान को इतना भी पता नहीं की प्रति बीघा कितना बीज डाला जाए जहां तक मुझे जानकारी है मैं ऐसे किसानों को जानता हूं जो दो तीन पैकेट प्रति बीघा बीज डालते हैं क्या यह सही है इस विषय पर भी मैंने कृषि विशेषज्ञों से विचार विमर्श किया उनका यह मानना था की प्रति बीघा एक पैकेट से ज्यादा किसी भी हालातो में बीज नहीं डाला जाए इस पर भी किस को विचार करना होगा।

3. बिजाई करने का तरीका आज ज्यादातर खेतों में देखा जाए वही पुराने तरीके से बिजाई की जा रही है अगर हम ज्यादा बीज डालेंगे और 2:15 फुट के पा ड़े पर पर बजाई करेंगे तो उस फसल में ना तो किसान स्प्रे करने के लिए अंदर जा सकता है और वह इतना गहरा हो जाता है कि उसमें ना धूप लगती है और ना ही पौधों को हवा मिलती है उसके अंदर इतना अंधेरा हो जाता है जिसके कारण सुंडी का अटैक ज्यादा होता है.

4. अबकी बार बिजाई करते समय इस बात का ध्यान रखा जाए की हमें पुरानी पद्धति छोड़कर अपनी पुरानी मशीनों को ही बीच में से एक हल हटा करके तीन हल से बी जाई करते हैं तो इसके भी परिणाम संतोष जनक होंगे क्योंकि पिछली बार आपने यह भी देखा होगा जो नरमा लेट बीजा गया था जिसकी हाइट कम थी उसके परिणाम अच्छे रहे इसलिए किसान साथियों से मेरा निवेदन है इस बात पर भी थोड़ा ध्यान रखें पिछली बार हमारे एरिया में मेड विधि से काफी किसानों ने नरमा लगाया था जिसका परिणाम संतोषजनक रहा.

5. किसान साथियों मेरा यह मानना है पिछले सीजन में ही खराब हुई फसल में कुछ सहयोग प्रकृति का भी था मौसम अनुकूल नहीं रहने की वजह से यह दिक्कतें आई थी कुछ लोग कहीं बैठते हैं चर्चा करते हैं तो एक दूसरे पर दोसा रोपण करते हैं इससे किसी का कुछ नहीं बिगड़ेगा हमारे पास कॉटन के अलावा अगर किसी किसान के पास विकल्प है तो उसे आजमाएं और कॉटन की भी सीमित बिजाई करें अच्छे तरीके से करें ऐसा नहीं है की सुंडी हमारे एरिया में ही है यह दौर गुजरात हरियाणा पंजाब से भी गुजर चुका है यहां से भी निकल जाएगा थोड़ा संयम रखें और सतर्क रहें

6. किसान भाई नरमे की बिजाई सही समय पर करें उसमें फास्फोरस खाद पहले नहीं डालें पोटाश और एसपी की मात्रा डालें कम से कम खर्च करके बिजाई करें उसके बाद नरमे की फसल में आप जितना ज्यादा नाइट्रोजन डालोगे उतना ही ज्यादा उस पर कीटों का अटैक होगा इसलिए फसल को जरूरत के अनुसार ही खाद डालें अगर नरमे की फसल में सुंडी का अटैक होता है होता क्या है वह तो होना ही है तो घबराएं नहीं अपनी ग्राम पंचायत स्तर पर कार्य रत कर्षी परवेक्सक की सलाह लेकर ही आगे बढ़े इसके लीए फोरामेन ट्रैप भी कारगर साबित हो सकते है।

निष्कर्ष

अपने खेत में नरमे की बिजाई करते समय इन सभी चीजों का ध्यान रखें, जिसमें मुख्य रूप से आपको किस प्रकार से खाद का उपयोग करना है तथा बीज की मात्रा और बीज का समय ध्यान रखना है।

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